6 Best Motivational Story in Hindi: मोटिवेशनल स्टोरी इन हिंदी

नमस्ते दोस्तो, इस ब्लॉग पोस्ट में मैं आज आपके लिये 6 ऐसी प्रेरणादायक कहानियाँ (6 Best Motivational Story in Hindi) प्रस्तुत करने जा रहा हूँ जो सफलता, छात्र जीवन, और वास्तविक जीवन की प्रेरणा पर केंद्रित है। तो अगर आप एक छात्र हैं, या जीवन में कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं, या अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए जुझ रहे हैं, ये प्रेरणादायक कहानियाँ आपमें एक नई ऊर्जा भरेगी और प्रोत्साहित करेगी।

इन मोटिवेशनल स्टोरी इन हिंदी के माध्यम से हम जानेंगे कि मेहनत, दृढ़ता और सही दृष्टिकोण कैसे एक साधारण आदमी को असाधारण सफलता दिला सकते हैं। तैयार हो जाइए, एक प्रेरक यात्रा पर चलने के लिए!

6 Best Motivational Story in Hindi 

तो ये हैं वो 6 मोटिवेशनल स्टोरी इन हिंदी जो आपके अंदर सकारात्मकता, लचीलापन और आत्म-विश्वास विकसित करेंगी और आपको अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए आवश्यक प्रेरणा प्रदान करेगी। 

1. मोटिवेशनल कहानी छोटी सी (Motivational Short Story in Hindi)

मोटिवेशनल कहानी छोटी सी (Motivational Short Story in Hindi)

एक राज्य था। एक दिन गुप्तचरों ने राजा को सूचना दी कि पडोसी राज्य हम पर हमला करने वाला है। गुप्तचरों ने बताया कि खबर एकदम पक्की है। सिर्फ तीन दिनों के भीतर पडोसी राज्य अपने विशाल सेना के साथ हम पर हमला कर देगा और उनकी सेना इतनी बड़ी है कि उनका सामना करना बहुत मुश्किल है। 

राजा बेहद चिंतित हो गया। परेशान हो गया। राजा ने तुरंत सभा बुलाई और सभी लोगों से सलाह मांगी कि अब हम लोगों का मरना तय है। अगर किसी व्यक्ति के पास कोई सल्यूशन है, कोई सुझाव है तो बता सकता है। कोई स्ट्रैटिजी (strategy) है तो बता सकता है। राजा के चतुर मंत्री ने कहा, अब जब जान पर बात आ गई है तो इसका एकमात्र उपाय है कि हमें आज ही अभी ही इसी वक्त पड़ोसी राज्य पर हमला कर देना चाहिए। 

राजा बोला मंत्री जी, हमारी सेना बहुत छोटी है, हम उनका मुकाबला कैसे कर पाएंगे? मंत्री बोला पडोसी राज्य अभी युद्ध के लिए तैयार नहीं है। अभी उस राज्य पर हमला कर दें तो वह संभल नहीं पाएंगे और हमारे जीतने की कुछ तो संभावना बनेगी। वैसे भी हम पर हमला होने वाला है। वह इतनी विशाल सेना है। हम यूं ही मरने वाले हैं। वह वैसे भी हमें तीन दिन बाद मारने वाले हैं। तो क्यों न कुछ न करने से हम यह कर सकते हैं। 

राजा को बात थोड़ी अच्छी लग गई। उसने तुरंत अपनी सेना को तैयार होने का आदेश दिया और उस राज्य के नागरिक भी सेना के साथ जुड़कर युद्ध में चले गए। पड़ोसी राज्य जो था वहां तक पहुंचने से पहले एक पुल पार करना होता था। एक पुल था तो जैसे ही वह सेना पुल पार करके उस राज्य में घुस गया तो राजा ने कहा, हम घुस चुके हैं अपने पड़ोसी राज्य में। यह जो पुल है। इस पुल को जला दो आप और जलाने के बाद में सेना को बोल दिया कि अब हमारे पास में कोई ऑप्शन नहीं है। 

हमारे पास में सिर्फ लड़ने का ऑप्शन है। हमारे पास में कोई प्लान भी नहीं है। हमारे पास सिर्फ प्लान A है। हम या तो लड़कर जीत लें या फिर हम यहां पर मर जाएं। हमारे पास में भागने का कोई ऑप्शन नहीं है। सभी सैनिक अपनी पूरी क्षमता के साथ में लड़े और पड़ोसी राज्य की बड़ी सेना को उन्होंने हरा दिया। इस एटीट्यूड (attitude) के साथ में कि हमारे पास में और कोई ऑप्शन B ही नहीं है। 

कहानी की सीख (Moral of the Story)

इस कहानी का मैसेज है जब आपके पास में प्लान B नहीं होता है, आपके पास सिर्फ प्लान A होता है, तब उसके पूरे होने की संभावना बहुत ज्यादा होती है। जब आपके पास में रास्ता सिर्फ एक होता है। यह अगर नहीं किया तो मर जाऊंगा, बर्बाद हो जाऊंगा, तो संभावना बढ़ जाती है उसमें कामयाब होने की। 

हर कामयाब इंसान का एक वक्त आता है जब उसको लगता है कि अब अगर मैंने कुछ नहीं किया तो बर्बाद हो जाऊंगा। और वह कर लेता है। 


2. पुजारी और महिला की कहानी (Motivational Story in Hindi for Student)

पुजारी और महिला की कहानी (Motivational Story in Hindi for Student)

कहानी एक ऐसी महिला की है जो कि रोजाना मंदिर जाती थी। उनका यह डेली रूटीन था। वह अपने शहर में रहें, गांव चली जाएं, किसी शादी में चली जाएं, जहां कहीं रहें, देश में रहें, विदेश में रहे, उन्हें किसी न किसी मंदिर जाकर के दर्शन करने होते थे। 

वह अपने शहर में जिस मंदिर में जाती थी, वहां रोजाना जाती थी और आस पास के महौल को, लोगो को ऑब्जर्व करती थी। उन्होंने देखा कि मंदिर में काफी कुछ गलत हो रहा है। एक दिन उनसे रहा नहीं गया, वो पंडित जी के पास गई और जाकर बोली कि पुजारी जी प्रणाम। मेरी समस्या का समाधान कीजिए। तो पंडित जी ने कहा कि बताइए क्या बात हो गई, हमसे कोई गलती हो गई या किसी ने आपसे कुछ कह दिया क्या?

उस महिला ने कहा कि मुसे किसी ने कुछ नहीं कहा लेकिन मैं यहां अक्सर देखती हूं कि यहां पर चल क्या रहा है। यहां पर नाटक चल रहा है। पुजारी जी ने कहा कि हो क्या गया? क्या बात हुई? 

तो महिला ने कहा कि मुझे लगता है कि जितने लोग मंदिर आ रहे हैं वह सिर्फ यहां आकर नौटंकी कर रहे हैं क्योंकि वह आधे से ज्यादा टाइम मोबाइल चला रहे होते हैं, भगवान का वीडियो बना रहे होते हैं, फोटो खींच रहे होते हैं, खुद की फोटो खींच रहे होते हैं, मंदिर की फोटो खींच रहे होते हैं। वह भक्ति में तो लीन होते ही नहीं। वह यहां सिर्फ दिखावा करने के लिए आते हैं कि मंदिर आ गए। 

कुछ लोग जो होते हैं, वह गॉसिप कर रहे होते हैं। बहू की बुराई, सास की बुराई, अपने करियर की बातें, बॉस की बुराई। यहां पर गपशप चल रही होती है। यहां पर भक्ति कम होती है, दिखावा ज्यादा होता है। वह महिला अपनी शिकायत जो थी कि पंडित की को सुनाई जा रही थी। पंडित जी ध्यान से सुन रहे थे। सारी बात खत्म होने के बाद में पंडित जी बोले कि आप एक काम कीजिएगा, आपकी सारी समस्या का समाधान आपको कल मिल जाएगा। आपको बस दो काम करने बोलेगी। 

महिला ने पूछा हां, बताइए क्या काम करने हैं? तो पंडित जी ने कहा कि दो काम कीजिएगा। पहला काम तो है कि पैदल पैदल आप कल मंदिर आइएगा। आपकी साधन-वाहन से मत आईयेगा और दूसरा काम, अपने घर से लोटे में जल भरकर लाईयेगा। लोटे को पूरा जल से भर लेना। बस ये ध्यान रखना कि उसमें से पानी न गिर जाए। यहां मंदिर आने के बाद में आप तीन परिक्रमा उस लोटे के साथ में कर लीजिएगा। उसके बाद में मैं आपको आपकी समस्या का समाधान दे दूंगा। 

महिला को जो बताया गया उन्होंने वही किया। पैदल पैदल घर से आई। मंदिर आकर के तीन परिक्रमा की। हाथ में लोटा था। लोटे में जल था। पूरा ऊपर तक भरा हुआ था। पूरा ध्यान था कि पानी न गिर जाए। सब कुछ हो गया। उसके बाद में जाकर पंडित जी को प्रणाम कर बोली कि अब बताइए क्या समाधान है? क्यों ये लोग भक्ति में लीन नहीं है? क्यों ये लोग नौटंकी करते हैं? 

पंडित जी ने कहा कि मेरे कुछ सवालों का जवाब दीजिए। आज जब आप अपने घर से मंदिर तक आई तो क्या आपने आज किसी को गपशप करते देखा? क्या आज आपने किसी को गॉसिप करते देखा? क्या आज आपने किसी को मोबाइल चलाते, वीडियो बनाते, फोटो खींचते देखा? क्या आपने देखा कि यहां लोग नौटंकी कर रहे हैं? महिला ने कहा कि नहीं मैंने आज किसी को नहीं देखा। मेरा कहीं ध्यान नहीं था। 

तो पंडित जी ने बोला कि पता है आपका ध्यान क्यों नहीं था, क्योंकि आपका सारा ध्यान इस लोटे पर था कि कहीं इसमें से पानी न छलक जाए। आपका सारा ध्यान इस पर था कि इसके साथ में मुझे तीन परिक्रमा करनी है। 

क्योंकि आपका खुद का सारा ध्यान भगवान की भक्ति में था। आपका सारा ध्यान, सारा एकाग्रता (concentration) उस लोटे में था। अपनी सारी शक्ति भक्ति वहीं पर लगा रखी थी। इसलिए आपके आसपास की दुनिया आपकी नजरों से गायब हो गई। इसीलिए आज आपने पाखंड नहीं देखा। उस महिला को समझ में आ गया कि पंडित जी क्या समझाना चाह रहे थे। 

कहानी की सीख (Moral of the Story)

दुनिया में अगर आप सक्सेस चाहते हैं तो एकाग्रता (concentration) सबसे बड़ा मंत्र है। सफलता (success) के लिए अगर कोई सबसे बड़ी बात लेकर जाती, तो वो है सबसे आपकी एकाग्रता (concentration)। यह छोटी सी कहानी आपको बताती है कि आप अगर अपने लक्ष्य (Goal) गोल के बारे में सोच रहे हैं तो सिर्फ अपने लक्ष्य के बारे में सोचिए। बाकी सारी बातें अपने आप साइड हो जाएंगी। 


3. असम्भव कुछ नहीं होता प्रेरणादायक हिंदी कहानी (Motivational Story in Hindi for Success)

असम्भव कुछ नहीं होता प्रेरणादायक हिंदी कहानी (Motivational Story in Hindi for Success)

एक गांव में दो बच्चों की दोस्ती हो गई। एक बच्चा 8 साल का था और दूसरा 10 साल का। दोनों बच्चों की दोस्ती दिन प्रतिदिन मजबूत होती जा रही थी। दोनों साथ में स्कूल पढ़ने के लिए जाते थे और साथ में खेलते थे। एक दिन दोनों बच्चे गेंद से खेल रहे थे और साथ खेलते खेलते गांव से दूर निकल गए और एक सुनसान इलाके में पहुंच गए। 

उस गांव से बाहर एक बहुत ही पुराना कुआं था जो कि सूख चुका था जहाँ खेलते खेलते उनकी गेंद उस पुराने कुएं में जा गिरी। अब जो 10 साल का बच्चा था वह बोला कि रुको में गेंद निकालता हूं और इसी हड़बड़ाहट में और जल्दबाजी में वह कुएं में गिर गया। गेंद तो निकली नहीं बल्कि वह बच्चा भी कुएं में चला गया। 

अब छोटा बच्चा जो कि बाहर खड़ा था वह घबरा गया और सोचा की अब क्या होगा। घरवाले तो मुझे बहुत मारेंगे, डांटेंगे। इसकी जान चली जाएगी। यह बच नहीं पाएगा। उसके मन में ऐसी बहुत ही उल्टे उल्टे नेगेटिव ख्याल आ रहे थे। अंदर से वो बच्चा चिल्ला रहा था बचाओ बचाओ। और इधर से बाहर खड़ा लड़का भी चिल्ला रहा था कि बचाओ बचाओ। लेकिन सुनसान जगह के कारण इनकी कोई आवाज नहीं सुन रहा था। 

दूर दूर तक कोई दिख नहीं रहा था। छोटा बच्चा इधर उधर दौड़कर देख लिया, लेकिन कोई दिख नहीं रहा था। अब अंदर पड़े बच्चे का गला चिल्लाने के कारण सूखता जा रहा था। आवाज भी नहीं निकल रही थी। सांसे फूल रही थी और आसपास में पानी भी मिल नहीं रहा था। समझ नहीं आ रहा था कि क्या करें। 

तभी उसको दूर झाड़ी के पास एक रस्सी और बाल्टी दिखाई दी। वह बच्चा दौड़कर गया और उसे लेकर आ गया। उसने रस्सी से बाल्टी को बांधी और रस्सी नीचे कुएं में फेंक दी और उस 10 साल के लड़के से कहने लगा कि आजा ऊपर मैं तुम्हें खींचता हूं। अंदर पड़ा लड़का कहने लगा पागल तो नहीं हो गए हो, तुम भी गिर जाओगे। तुम मुझे नहीं खींच सकते हो। यह नहीं हो सकता है। 

उस आठ साल के लड़के ने कहने लगा कि नहीं मैं करके दिखाऊंगा। तुम बाल्टी पकड़ो और ऊपर आ जाओ। उस आठ साल के बच्चे ने अपनी पूरी जान लगा दी। उसके गला सूख चुका था। प्यास लग रही थी। हालत खराब हो चुका था, लेकिन उसके बावजूद उसने उस रस्सी को अपने पूरे दम से खींचा और उस 10 साल के लड़के को बाहर निकाल दिया। 

अब उस बच्चे को निकालते निकालते रात हो गई थी। अब दोनों बच्चे गांव की तरफ जा रहे थे। जब दोनों गांव पहुंचे तो भीड़ इकट्ठी हो गई थी। इन दोनों के माता पिता रो रहे थे। गांव वाले कह रहे थे कि बच्चे मिल जाएंगे, लेकिन मिले कहीं नहीं। तो सब परेशान थे। इन दोनों बच्चों को जब गांव की तरफ आते हुए देखा तो लोग खुश हो गए कि मिल गए दोनों बच्चे। 

अब लोग दोनों बच्चे से पूछने लगे कि कहां गए थे। इन दोनों बच्चों को समझ नहीं आ रहा था कि क्या बोले। सच बोले तो मार पड़ेगी। इतनी दूर चले गए, कुएं में गिर गए, और झूठ बोले तो? क्या बहाना मारे? दिमाग काम नहीं कर रहा था। ऐसे हालात थे और दिनभर से परेशान भी थे। अब इन दोनों ने सच बोल दिया। 

छोटे बच्चे ने कहा कि यह कुएं में गिर गया था तो मैंने रस्सी से खींचकर बाहर निकाला। अब जैसे ही यह बोला तो लोग हंसने लगे कि तुम पागल हो क्या? तुमसे एक बाल्टी पानी नहीं खींचती और तुम 10 साल के बच्चे को खींचकर बाहर निकाल दिया। लोग उन बच्चों का मजाक उड़ाने लगे। तभी गांव के सबसे बुजुर्ग व्यक्ति जो वहां के सरपंच थे, उन्होंने कहा कि यह बच्चे सच बोल रहे थे। ये वाकई में 10 साल के बच्चे को खींचकर बाहर निकाल दिया। 

अब इसके दो कारण थे। पहली बात तो यह कि इसके पास कोई और विकल्प नहीं था। इसे मालूम था कि इसे बाहर नहीं निकाला तो यह मर जाएगा। और दूसरी बात, इसके आसपास में कोई यह कहने वाला नहीं था कि तुमसे नहीं हो पाएगा। इसीलिए बच्चे सच बोल रहे हैं। 

कहानी की सीख (Moral of the Story)

अगर जिंदगी में आप कामयाबी (success) पाना चाहते हो तो ये बातें याद रखिए। पहला, जब आपके पास कोई ऑप्शन नहीं बचा है, तो आपको उस काम को करके ही दिखाना है। और दूसरा जब आपके आसपास के लोग कहने लगे कि तुमसे नहीं होगा तो बहरे बन जाओ। उनकी बात को मत सुनो। 


4. सोंच, गौतम बुद्ध की प्रेरनादायक कहानी (Buddha Motivational Story in Hindi)

सोंच, गौतम बुद्ध की प्रेरनादायक कहानी (Buddha Motivational Story in Hindi)

एक बार गौतम बुद्ध वैशाली नगरी में धर्म प्रचार के लिए जा रहे थे। जब वह नगरी के बीचों बीच से गुजर रहे थे तो उन्होंने देखा कि कुछ सैनिक तेजी से भागती हुई एक लड़की का पीछा कर रहे हैं। वह लड़की बहुत डरी हुई एक कुएं के पास जाकर खड़ी हो गई और बहुत प्यासी भी थी और वहीं पर बुद्ध भी पानी पीने के लिए आए हुए थे। बुद्ध ने उस बालिका को अपने पास बुलाया और कहा कि वह उनके लिए कुएं से पानी निकाले, स्वयं भी पिए और उन्हें भी पिलाए। 

इतनी देर में सैनिक वहां पहुँच गए। बुद्ध ने उन सैनिकों को हाथ के संकेत से रोकने को कहा। उनकी बात पर वह कन्या बोली, महाराज, मैं एक अछूत कन्या हूं। मेरे हाथ से पानी निकालने पर जल दूषित हो जाएगा। बुद्ध ने उससे फिर कहा पुत्री, बहुत जोर की प्यास लगी है। पहले तुम पानी पिलाओ। 

इतने में वैशाली नगरी के राजा भी वहां आ पहुंचे। उन्होंने बुद्ध को नमन किया और सोने के बरतन में केवड़े और गुलाब का सुगंधित पानी पीने के लिए पेश किया, लेकिन उसने उसे लेने से इनकार कर दिया। बुद्ध ने एक बार फिर बालिका से अपनी बात दोहराई। इस बार बालिका ने साहस बटोरकर पानी निकालकर स्वयं भी पिया और गौतम बुद्ध को भी पिलाया। 

पानी पीने के बाद बुद्ध ने बालिका के भय का कारण पूछा। लडकी ने बताया, मुझे संयोग से राजा के दरबार में गाने का अवसर मिला था। राजा ने मेरा गीत सुन मुझे अपने गले की माला पुरस्कार में दी। लेकिन उन्हें किसी ने बताया कि मैं एक अछूत कन्या हूं। यह जानते ही उन्होंने अपने सैनिकों को मुझे कैदखाने में डाल देने का आदेश दिया। 

मैं किसी तरह से बचकर यहां तक पहुंची थी कि आप मिल गए। इस पर बुद्ध ने कहा, सुनो राजन, मैं चाहता हूं कि आप मेरी इस बात को हमेशा याद रखें कि किसी भी इंसान की पहचान उसके धर्म या जाति से नहीं, बल्कि उसके गुणों और कर्मों से होती है। 

जिस बालिका के मधुर कंठ से निकले गीत का आपने आनंद उठाया, उसे पुरस्कार दिया। जिसके कार्य इतने अच्छे हैं वह अछूत हो ही नहीं सकती है। यहां पर नीचे सोच और छोटे कार्य करके अछूत होने का परिचय तो आपने दिया है। इसलिए मेरी नजरों में यह कन्या नहीं बल्कि आप अछूत हैं। 

राजा नरेश बुद्ध के सामने शर्मिंदा होने के अलावा और कर भी क्या सकते थे? उन्होंने बुद्ध से क्षमा मांगी। 

कहानी की सीख (Moral of the Story)

दोस्तों, इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलता है कि कोई भी इंसान अपने कार्यों और विचारों से बड़ा बनता है, अपने धर्म जाति से नहीं।


5. विश्वास, एक मोटीवेशन कहानी छोटी सी (Motivational Kahani in Hindi)

विश्वास, एक मोटीवेशन कहानी छोटी सी (Motivational Kahani in Hindi)

एक गांव में एक व्यक्ति रहता था। एक बार उसे बहुत तेज टीबी का बुखार हो गया। अपना इलाज करवाने के लिए वह वहां के एक वैद्य के पास उनके घर पहुंचा। घर पहुंचने के बाद उसे पता चला कि वैद्य जी घर पर नहीं हैं। व्यक्ति के पूछने पर पता चला कि वह खेत में काम कर रहे हैं। फिर वह व्यक्ति उनके खेत में चला गया। 

खेत में जा करके उसने सारी बात वैद्य जी को बताई कि क्या बीमारी है, क्या प्रॉब्लम है। सब कुछ बताया। सब कुछ जानने के बाद बैदजी ने सोचा कि उसे कोई दवाई लिख कर देता हूं, लेकिन खेत में न पेपर था न पेन था। अब उसे समझ नहीं आ रहा था कि उसे दवाई लिख कर कैसे दे। 

तभी उसकी नजर पड़ी एक लाल ईंट पर। उसने वह लाल ईंट उठाई और वहां पर एक मिट्टी का टुकड़ा पड़ा हुआ था। उसे उठाया और उस मिट्टी के टुकड़े से उस ईंट पर कुछ लिखा। उसके बाद उस व्यक्ति को देते हुए कहा, यह दवाई ले लेना और पानी में घोलगोल कर पी लेना। अब समस्या यह थी कि वह व्यक्ति अनपढ़ था। उसे वैद जी की बात समझ नहीं आई, लेकिन वह उस ईंट को लेकर घर चला आया। 

तीन महीने के बाद वह व्यक्ति उस वैद जी के पास फिर से आया और बोला, वैद्यजी, आपने जो दवाई दी थी, उससे मैं आधे से ज्यादा ठीक हो चुका हूं। अगर वह दवाई फिर से मुझे दे दे तो मैं पूरे तरीके से ठीक हो जाऊंगा। फिर वैद जी ने कहा, मैंने तुम्हें दिया तो था। अब वह व्यक्ति क्या कहता है? वह व्यक्ति कहता है, ईंटे तो हमारे घर में भी बहुत हैं, पर आपने जो उस ईंट पर मंत्र फूंक कर दिया था, वह दे दे तो मेरा काम बन जाए। 

तो वैद जी हैरान रह गए। जब उन्होंने पूरी बात पूछी तो पता चला कि वह व्यक्ति पिछले तीन महीनों से उस ईंट को पानी में गोल गोल कर पी रहा था। लेकिन वैद जी ने उसे फिर भी कुछ नहीं बताया। सच्चाई नहीं बताई। जानते हो क्यों? क्योंकि उसे इलाज पर पूरा भरोसा था और वह ठीक हो रहा था। 

वैद जी ने फिर से ईंट ली और मिट्टी से उस पर दवाई को लिखकर उस व्यक्ति को दे दी और वह व्यक्ति कुछ समय बाद पूरी तरीके से ठीक हो गया। 

कहानी की सीख (Moral of the Story)

दोस्तो, यह छोटी सी कहानी हमें बहुत बड़ी सीख देती है। अगर हमें किसी चीज पर पूरा भरोसा है तो वह होकर ही रहेगा। जैसे उस व्यक्ति को वैद जी के इलाज पर पूरा भरोसा था और वह ठीक भी हो गया। तो यही चीज हमारी जिंदगी में भी लागू होती है।

अगर आपको अपने सपनों पर पूरा भरोसा है तो वह एक न एक दिन जरूर पूरे होंगे। बस अपने सपनों पर भरोसा रखना और ईमानदारी से मेहनत करते रहना, देखना एक दिन आप जरूर सफल होंगे। विश्वास एक ऐसी चीज है जो किसी भी असंभव काम को संभव कर सकता है। विश्वास अगर आपको एक पत्थर की मूर्ति पर भी हो तो वह आपकी बड़ी से बड़ी मनोकामना भी पूरी कर सकता है।


6. डॉ अब्दुल कलाम की रियल लाइफ स्टोरी इन हिंदी (Real-Life Motivational Strory in Hindi)

डॉ अब्दुल कलाम की रियल लाइफ स्टोरी इन हिंदी (Real-Life Motivational Strory in Hindi)

डॉ एपीजे अब्दुल कलाम जी का जन्म तमिलनाडु के रामेश्वरम शहर के एक छोटे से गांव धनुषकोडी में एक बहुत ही गरीब परिवार में हुआ था। जहां उनके पिता एक छोटी सी नाव चलाया करते थे जिससे उनकी फैमिली को मुश्किल से दो वक्त की रोटी नसीब होती थी। उनके घर में कोई भी पढ़ा लिखा नहीं था लेकिन उन्हें बचपन से ही पढ़ाई लिखाई का बहुत शौक था। 

गरीब होने के बावजूद उनकी फैमिली उन्हें पढ़ाई के लिए पूरी तरह से सपोर्ट करती थी। लेकिन एपीजे अब्दुल कलाम जी हर सुबह स्कूल जाने से पहले न्यूजपेपर बेचा करते थे, ताकि उनकी फैमिली पर उनकी पढ़ाई का ज्यादा प्रेशर न आए। स्कूल में उनके मार्क्स उतने अच्छे नहीं आते थे, लेकिन वह हार्डवर्किंग स्टूडेंट्स में से एक थे। उनका हमेशा सिर्फ एक फोकस रहता था कि हर दिन कुछ नया सीखा जाए और इसीलिए वह घंटो घंटो तक पढ़ाई किया करते थे। 

बचपन से ही वह इंडियन आर्मी फोर्सेज के पायलट बनना चाहते थे। इसीलिए उन्होंने अपनी स्कूलिंग खत्म होने के बाद मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के तहत एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में एडमिशन लिया। यह किस्सा तब का है जब मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में पढ़ रहे थे। 

उस वक्त वह एक सीनियर क्लास कॉलेज के प्रोजेक्ट पर काम कर रहे थे और उस प्रोजेक्ट के प्रोग्रेस को लेकर कॉलेज के डीन उनसे बहुत गुस्सा हो गए और उन्होंने एपीजे अब्दुल कलाम जी से कहा कि अगर तीन दिन में यह प्रोजेक्ट कंप्लीट नहीं हुआ तो मैं तुम्हारी स्कॉलरशिप कैंसल कर दूंगा। यह बात सुनकर एपीजे बहुत घबरा गए और उन्होंने दिन रात बैठकर तीन दिन के अंदर उस प्रोजेक्ट को कंप्लीट कर दिया। 

यह देखकर उनके डीन बहुत खुश हो गए और उन्होंने एपीजे अब्दुल कलाम जी से कहा कि मैं जानता था तुम्हें काबिलियत है, लेकिन मैं देखना चाहता था कि तुमने मुश्किल वक्त को सहन करने की क्षमता है या नहीं। 

कॉलेज खत्म होने के बाद जब एपीजे अब्दुल कलाम जी ने इंडियन आर्मी फोर्सेज में फाइटर पायलट के पोस्ट के लिए अप्लाई किया, उस वक्त सिर्फ आठ वैकेंसीज ओपन थी और बदकिस्मती से उनका नाम 9 नंबर पर आया और वह आम फोर्सेज के लिए सिलेक्ट नहीं हो पाए। जिसके बाद उन्होंने डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन यानी कि डीआरडीओ ज्वॉइन की, जहां वह छोटे से होवरक्राफ्ट डिजाइन किया करते थे। लेकिन वह डीआरडीओ में अपनी जॉब से खुश नहीं थे, क्योंकि उन्हें वहां कुछ नया सीखने नहीं मिल रहा था। 

तभी उनकी मुलाकात हमारे इसरो (ISRO) के फाउंडर विक्रम साराभाई जी से हुई। उनको एपीजे अब्दुल कलाम जी की मेहनत और हर वक्त कुछ नया सीखने की चाहत बहुत पसंद आई और उसके बाद उनका डीआरडीओ (DRDO) से इसरो में ट्रांसफर हुआ। इसरो में एपीजे अब्दुल कलाम इंडिया के सबसे पहले सक्सेसफुल सैटेलाइट लॉन्च एसएलवी थ्री रोहिणी (SLV3 Rohini) के प्रोजेक्ट डायरेक्टर थे। 

उसके बाद उन्होंने कई प्रोजेक्ट इनिशिएट किए। आईटी (IT) में पृथ्वी मिसाइल (Prithvi Missile) सक्सेसफुली लॉन्च करने के बाद उन्हें नासा (NASA) ने जॉब ऑफर करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने उसे ठुकरा दिया। पृथ्वी मिसाइल के सक्सेसफुल लॉन्च के बाद इंडियन कैबिनेट के तहत रिसर्च के लिए 3.8 Billion रुपीस के फंड अलॉट कर दिए। जिसके बाद एपीजे अब्दुल कलाम जी ने उनकी टीम के साथ मिलकर अग्नि(Agni), त्रिशूल (Trishul), आकाश (Akash), नाग(Nag) जैसे कई बड़े मिसाइल लॉन्च किए। 

उनके लीडरशिप के अंडर इंडिया को सबसे बड़ी कामयाबी तब मिली जब में इंडिया ने सीक्रेटली सारे न्यूक्लियर बम टेस्ट करके इंडिया को सारी दुनिया के सामने एक न्यूक्लियर पावर घोषित कर दिया। जिसके बाद एपीजे अब्दुल कलाम जी को मिसाइल मैन ऑफ इंडिया (Missile Man of India) के नाम से बुलाया गया। 

2002 में एपीजे इंडिया के 11वे प्रेसिडेंट बने। अपने प्रेसिडेंशियल टर्म के वक्त जब वह केरला विजिट के लिए गए थे, उस वक्त उन्होंने दो लोगों को केरला के राजभवन में प्रेसिडेंशियल गेस्ट (Presidential Guest)  इनवाइट किया था। वह दो लोग कोई बड़े सेलिब्रिटी नहीं थे, बल्कि एक चपरासी और एक छोटे से होटल का मालिक था, जिनके साथ उनकी त्रिवेंद्रम में काम करते वक्त दोस्ती हो गई थी। 

ऐसा ही एक किस्सा 2005 पाँच का है जब उनकी फैमिली राष्ट्रपति भवन में रहने आई थी। लगभग 10 दिन तक उनकी फैमिली के 52 लोग राष्ट्रपति भवन में थे और उनके जाने के बाद एपीजे अब्दुल कलाम जी ने 3,52,000 अपनी फैमिली के रहने और खाने का खर्चा सरकार को दिया था। 

जब एक रिपोर्टर ने उनको यह पूछा कि आपने सरकार को पैसा क्यों दिया तो उन्होंने जवाब देते हुए कहा था कि सरकार मेरे रहने और खाने का पैसा देती है नाकि मेरे परिवार के। और इसी खुद्दारी ने पूरी दुनिया को इनसे प्यार करने पर मजबूर कर दिया। इनके पास जायदाद कोई नहीं थी। अपनी किताबों के अलावा पर अपनी कहानी से और अपने कामों से यह मिसाइल मैन पूरी दुनिया के लिए मिसाल बन गए।


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Rakesh Dewangan

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