हुस्न-ए-बेनजीर के तलबगार हुए बैठे हैं – Husn, Talabgar, Jhalak, Sadiyan, Gunahgar par Shayari

हुस्न-ए-बेनजीर के तलबगार हुए बैठे हैं,
उनकी एक झलक को बेकरार हुए बैठे हैं,
उनके नाजुक हाथों से सजा पाने को,
कितनी सदियों से गुनाहगार हुए बैठे हैं।

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