कोई मरहम नहीं चाहिये – Marham, Zakhm, Jhalak Par Shayari

कोई मरहम नहीं चाहिये
जख्म मिटाने के लिये,
तेरी एक झलक ही काफी है
मेरे ठीक हो जाने के लिये।

यह भी पढ़ें

ना चांद चाहिए – Chand, Falak, Teri Jhalak

ना चांद चाहिएना फलक चाहिएमुझे तो बस तेरीएक झलक...

मैं तो वहीं से गुजरता हूँ – Apnapan, Jhalak, Aawaz, Jamana

मैं तो वहीं से गुजरता हूँजहाँ अपनापन झलकता है।वरना...

हुस्न-ए-बेनजीर के तलबगार हुए बैठे हैं – Husn, Talabgar, Jhalak, Sadiyan, Gunahgar par Shayari

हुस्न-ए-बेनजीर के तलबगार हुए बैठे हैं,उनकी एक झलक को...

टॉप ट्रेंडिंग

हो भी नहीं और हर जहाँ होतुम एक गोरखधंधा...

परिन्दों की फ़ितरत सेआए थे वो मेरे दिल में,ज़रा...

शब्द और दिमाग सेदुनिया जीती जाती है,दिल तो आज...