Top 15 Short Story In Hindi With Moral For Kids (2024)

नमस्ते दोस्तों, नैतिक कहानियाँ (moral stories in Hindi) बच्चों के मानसिक विकास, उनके चरित्र को आकार देने, सहानुभूति पैदा करने, दया और ज्ञान सिखाने में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। चाहे वह कछुए और खरगोश की कहानी हो या शेर और चूहे की कहानी, ये कहानियाँ युवा मन को मोहित करती हैं और साथ ही जीवन की महत्वपूर्ण सीख भी देती हैं। 

इसी को ध्यान में रखते हुये, आज के इस पोस्ट में हम प्रस्तुत कर रहे हैं “top 10 short story for kids with moral in Hindi. यह short moral story in Hindi न केवल आपके बच्चो को मनोरंजन प्रदान करेगी, बल्कि उनको अच्छे मार्गदर्शन की भी प्रेरणा देगी।

Table of Contents

Top 15 Short Story In Hindi With Moral For Kids

1. चींटी और कबूतर की कहानी (Short Story in Hindi with Moral for Kids)

चींटी और कबूतर की कहानी (Short Story in Hindi with Moral for Kids)

एक समय की बात है, पेड़ पर से एक चींटी तालाब में गिर गई। एक कबूतर ने उसे अपना जीवन बचाने के लिए जी तोड़ कोशिश करते हुए देखा। उसने एक पत्ते को तोड़ा और चींटी के पास फेंक दिया। चींटी झट से उस पत्ते पर चढ़ गई और बड़ी कृतज्ञता भरी नजरों से उसने कबूतर का धन्यवाद किया। वह बहुत थक गई थी। 

कुछ सप्ताह बाद की बात है। एक बहेलिया जंगल में आया। बहेलियों का तो काम ही होता है पक्षियों को पकड़ना। उसने कुछ दाने जमीन पर फैंके और उस पर अपना जाल बिछा दिया। वह चुपचाप किसी पक्षी के जाल में फंसने का इंतजार कर रहा था। 

वो चीटी जो वहीं कहीं से गुजर रही थी, उसने जब वह सारी तैयारी देखी तो क्या देखती है कि वही कबूतर जिसने उसकी जान बचाई थी, उड़कर उसी जाल में फंसने के लिए धीरे धीरे नीचे उतर रहा था। 

चीटी ने एकदम आगे बढ़कर बहेलिये के पैर पर इतनी बुरी तरह काट दिया कि बहेलिये के मुंह से चीख निकल गई – तेरी ऐसी की तैसी। हाय! ओह परमात्मा!

कबूतर ने एक दम देखा कि शोर किधर से आ रहा है और बहेलिए को देखते ही सब कुछ उसकी समझ में आ गया। वह दूसरी दिशा में उड़ गया और उसकी जान बच गई। चीटी भी अपने काम पर चल दी। 

तभी तो कहते हैं कर भला सो हो भला


2. ईमानदार छोटी बच्ची की कहानी (Very Short Story in Hindi with Moral)

ईमानदार छोटी बच्ची की कहानी (Very Short Story in Hindi with Moral)

एक बार एक राज्य में अकाल पड़ गया। लोग भूख के कारण मरने लगे। उस राज्य के राजा ने घोषणा करवा दी कि राज्य के सभी बच्चों को एक एक रोटी दी जाएगी। 

अगले ही दिन राज्य के सभी बच्चे राजा के महल के पास इकट्ठे हो गए। वहां पर कुछ रोटी छोटी थी तो कुछ रोटी बड़ी थी। सभी बच्चे बड़ी रोटी पाना चाहते थे, जिसके कारण उनकी आपस में धक्का मुक्की और लड़ाई होने लगी। राजा ने देखा कि एक छोटी सी लड़की चुपचाप खड़ी थी। अंत में एक सबसे छोटी रोटी बची। उस लड़की ने उसे खुशी खुशी लिया और घर चली गई। 

दूसरे दिन भी ऐसा ही हुआ। जब रोटी बांटी जा रही थी तो तब भी उस लड़की को सबसे छोटी रोटी ही मिली। उसने खुशी खुशी रोटी ली और घर चली गई। घर जाकर जब रोटी खाने लगी तो उसमें से एक सोने का सिक्का निकला। उस लड़की के परिवार वालों ने कहा यह सोने का सिक्का उस राजा को वापिस दे आओ। यह हमारी अमानत नहीं है। 

वो लड़की दौड़कर राजा के महल पहुंची और राजा से कहा मेरी रोटी में से सोने का सिक्का निकला है। रोटी बनाते वक्त गलती से आटे में गिर गया होगा। आप इसे वापस रख लीजिए। राजा उस लड़की की ईमानदारी को देखकर बहुत खुश हुआ। 

राजा की कोई भी बेटी नहीं थी इसलिए उसने उस लड़की को गोद ले लिया और उसके परिवार वालों को भी अपने ही महल में रख लिया। इतना ही नहीं राजा ने कुछ दिनों बाद अपनी सारी की सारी संपत्ति उस लड़की के नाम कर दी। 

Moral of the Short Story in Hindi 

तो दोस्तों इस कहानी से हमने सीखा कि ईमानदारी बड़े लोगों की अच्छाइयों में से एक है। ईमानदारी किसी भी व्यक्ति को अच्छाई के रास्ते पर ले जाती है। ईमानदारी व्यक्ति का मन शांत और स्थिर रहता है। इसलिए ईमानदारी आपको हमेशा बड़ा बनाए रखेगी।


3. हाथी की मित्रता (Short Moral Story in Hindi for Kids)

हाथी की मित्रता (Short Moral Story in Hindi for Kids)

बहुत पुरानी बात है। एक जंगल में एक हाथी किसी मित्र की तलाश में इधर उधर घूम रहा था। उसे पेड़ पर एक बंदर दिखाई दिया। हाथी बोला बंदर भाई, क्या तुम मेरे मित्र बनोगे? बंदर बोला आप तो बहुत बड़े हैं। आप मेरी तरह एक पेड़ पर झूल भी नहीं सकते तो फिर आपकी मेरी दोस्ती कैसी है? 

अगले दिन उसकी मुलाकात एक खरगोश से हुई। क्यों खरगोश जी, क्या तुम मेरे मित्र बनना पसंद करोगे? खरगोश बोला – आप तो बहुत बड़े हैं। आप मेरे बाड़े में घुस भी नहीं सकेंगे। मेरी आपकी दोस्ती मुमकिन नहीं। 

हाथी अब मेढक के पास पहुंचा। मेरा कोई मित्र नहीं है। मेढक मित्र, तुम अगर मुझे अपना दोस्त बना लो तो तुम्हारी बड़ी कृपा होगी। मेढक बोला – अरे वाह! मान न मान मैं तेरा मेहमान। तुम इतने बड़े और मैं इतना छोटा। कुछ तो सोचो। यह बेमेल की दोस्ती नहीं हो सकती। फिर तुम मेरी तरह फुदक भी तो नहीं सकते। जाओ भाई, कहीं और अपनी दाल खिलाओ।

अचानक हाथी को एक लोमड़ी दिखाई दी। उसने उसे रोका और पूछा, लोमड़ी सुनो, क्या तुम मुझे अपना मित्र बनाना पसंद करोगी? देखो, ना मत कहना। मैं बड़ी उम्मीद से तुम्हारे पास आया हूं। बोलो बनोगी ना तुम मेरी मित्र।

लोमड़ी बोली – ना बाबा ना, अपना साइज तो देखो। गलती से मैं तुम्हारे पांव के नीचे आ गई तो मेरी तो चटनी बन जाएगी। ना बाबा ना कोई और घर देखो। कमाल है। कोई मुझे अपना मित्र नहीं बनाना चाहता। 

अगले दिन हाथी ने देखा कि जंगल के सभी जानवर बहुत तेजी से भाग रहे थे। उसने लोमड़ी से पूछा क्या हुआ? क्यों ऐसे भाग रहे हो? हाथी दादा पीछे शेर है और वह हम सबको मारकर खा जाना चाहता है। तभी सभी जानवर अपनी अपनी जान बचाकर कहीं छुप जाना चाहते हैं।

शेर तो जानवरों के पीछे हाथ धोकर पड़ा था। हाथी ने शेर से कहा, श्रीमान! क्यों व्यर्थ में सबकी जान के पीछे पड़े हो? सारे जानवरों को क्या एक ही दिन में मार दोगे? चाचा अपना रस्ता देख, तुझे क्या जो मेरा दिल करेगा करूं। 

हाथी को समझ आ गया कि लातों के भूत बातों से नहीं मानते। उसने शेर को जोर से एक लात मारी और शेर के होश ठिकाने आ गए और वह डरकर भाग गया। हाथी ने सबको जब यह खुशखबरी सुनाई तो सबकी खुशी का ठिकाना न रहा। 

सभी ने हाथी को धन्यवाद दिया और कहा, हमारा मित्र बनने के लिए सचमुच तुम्हारा साथ बिल्कुल ठीक है। 

शिक्षा: मित्र वह जो मुसीबत में काम आए।


4. कर्मों का फल – गाय और बाघ की सुन्दर कहानी (Small Story in Hindi with Moral)

कर्मों का फल - गाय और बाघ की सुन्दर कहानी (Small Story in Hindi with Moral)

दोस्तों, एक बार की बात है। एक गाय घास चरने के लिए जंगल में गई। शाम ढलने ही वाली थी कि उसने देखा एक बाग उसकी तरफ दबे पांव आ रहा था। वह डर के मारे इधर उधर भागने लगी। वह बाग भी उसके पीछे दौड़ने लगा। दौड़ते हुए गाय को सामने एक तालाब दिखाई दिया। 

घबराई हुई गाय उस तालाब के अंदर घुस गई। वह बाग भी उसका पीछा करते हुए तालाब के अंदर घुस गया। तब उन्होंने देखा कि वह तालाब बहुत गहरा नहीं था। उसमें पानी कम था और वह कीचड़ से भरा हुआ था। 

उन दोनों के बीच दूरी काफी कम हो गई, लेकिन अब वह दोनों कुछ भी नहीं कर पा रहे थे। वह गाय उस कीचड़ के अंदर धीरे धीरे धंसने लगी। वह बाग भी उसके पास होते हुए भी उसे पकड़ नहीं पा रहा था। वह भी धीरे धीरे कीचड़ के अंदर धंसने लगा। 

दोनों ही करीब करीब गले तक उस कीचड़ के अंदर फस गए। दोनों हिल भी नहीं पा रहे थे। गाय के करीब होने के बावजूद भी वह बाग उसे नहीं पकड़ पा रहा था। थोड़ी देर बाद गाय ने उस बाग से पूछा क्या तुम्हारा कोई गुरु या कोई मालिक है?

बाग ने गुर्राते हुए कहा मैं तो जंगल का राजा हूं, मेरा कोई मालिक नहीं। मैं खुद ही जंगल का मालिक हूं। गाय ने कहा, लेकिन तुम्हारी उस शक्ति का यहां पर क्या उपयोग है? उस बाग ने कहा तुम भी तो फंस गई हो और मरने के करीब हो। तुम्हारी भी तो हालत मेरे ही जैसी है। 

गाय ने मुस्कुराते हुए कहा, बिल्कुल नहीं। मेरा मालिक जब शाम को घर आएगा और मुझे वहां नहीं पाएगा तो वह ढूंढते हुए यहां जरूर आएगा और मुझे इस कीचड़ से निकालकर अपने घर ले जाएगा। लेकिन तुम्हें कौन ले जाएगा? 

थोड़ी ही देर में सच ही में एक आदमी वहां पर आया और गाय को कीचड़ से निकालकर अपने घर ले गया। जाते समय गाय और उसका मालिक दोनों एक दूसरे की तरफ कृतज्ञतापूर्वक देख रहे थे। वे चाहते हुए भी उस बाग को कीचड़ से नहीं निकाल सकते थे क्योंकि उन्हें अपनी जान का खतरा था। 

Moral of the Story In Hindi

दोस्तों, किसी पर निर्भर नहीं होना अच्छी बात है लेकिन मैं ही सब हूं, मुझे किसी के सहयोग की कोई आवश्यकता नहीं है। यही अहंकार है और यहीं से विनाश का बीजारोपण हो जाता है। ईश्वर से बड़ा इस दुनिया में सच्चा हितैषी कोई नहीं होता क्योंकि वही अनेक रूपों में हमारी रक्षा करता है। 

दोस्तों, हमारी इस कहानी में गाय समर्पित हृदय का प्रतीक है। बाग अहंकारी मन का प्रतीक है और मालिक ईश्वर का प्रतीक है। कीचड़ यह संसार है और यह संघर्ष अस्तित्व की लड़ाई है। तो दोस्तों कैसी लगी आपको हमारी यह कहानी? Comment में जरूर बताये।


5. एक चोर और गाय की सीख देने वाली कहानी (Moral Stories in Hindi for Class 5) 

एक चोर और गाय की सीख देने वाली कहानी (Moral Stories in Hindi for Class 5) 

दोस्तों एक बार की बात है, भगवान ने नारद जी से कहा कि आप तो हमेशा भ्रमण करते रहते हैं इसलिए आप कोई ऐसी घटना बताइए जिससे आप हैरान हो गए हों। 

नारद जी ने कहा – प्रभु मैं अभी जंगल से ही आ रहा हूं। वहां एक गाय दलदल में फंसी हुई थी। उसे बचाने वाला वहां कोई नहीं था। तभी वहां से एक चोर गुजरा। गाय को फंसा हुआ देखकर भी वो नहीं रुका। उल्टे वो उस पर पैर रखकर दलदल लांघकर निकल गया। 

आगे जाकर उस चोर को सोने की मोहरों से भरी एक थैली मिल गई। थोड़ी देर बाद वहां से एक वृद्ध साधु भी गुजरा। उसने उस गाय को बचाने की पूरी कोशिश करी। पूरे शरीर का जोड़ लगाने के बाद उस साधु ने उस गाय को बचा लिया। लेकिन मैंने देखा कि गाय को दलदल से निकालने के बाद वो साधु आगे जाकर एक गड्ढे में गिर गया और उसे चोट लग गई। 

भगवान अब आप ही बताइए ये कौन सा न्याय है? भगवान मुस्कुराए फिर बोले – नारद जो हुआ वो सही हुआ। जो चोर गाय पर पैर रखकर भागा था उसकी किस्मत में तो उस दिन खजाना लिखा था लेकिन उसके इस पाप के कारण उसे केवल कुछ मोहरें ही मिली। 

वहीं उस साधु को गड्ढे में इसलिए गिरना पड़ा क्योंकि उसके भाग्य में उस दिन मृत्यु लिखी थी। लेकिन गाय को बचाने के कारण उसके पुण्य बढ़ गए और उसकी मृत्यु एक छोटी सी चोट में बदल गई। 

कहानी का सार (Moral of the Story in Hindi)

इंसान के कर्म ही उसका भाग्य तय करते हैं। भगवान की ये बात सुनकर नारद जी संतुष्ट हो गए। इसलिए हमें अपने जीवन में हमेशा अच्छे कर्म करते रहने चाहिए। तो दोस्तों, कैसी लगी आप सभी को यह कहानी। Comment में जरूर बताये।


6. बारिश और चिड़िया का घर सीख देने वाली छोटी कहानी (Class 8 Moral Stories in Hindi)

बारिश और चिड़िया का घर सीख देने वाली छोटी कहानी (Class 8 Moral Stories in Hindi)

एक समय की बात है, एक छोटे से गांव में एक बहुत ही सुंदर बागीचा था। वहां पर अनेक प्रकार के फूल और पौधे थे। गांव के बच्चे उस बागीचे में बहुत खेलते थे और उसका ख्याल बहुत ही अच्छे से रखते थे। बगीचे में एक पुराना पेड़ भी था, जिसकी छाया से बच्चे भी खेलने आते थे। 

एक दिन बारिश की बूंदे गिरने लगी। पहले तो लोगों को यह बहुत ही अच्छा लगा लेकिन बारिश बढ़ते बढ़ते तेज हो गई। बारिश के बाद बागीचे में बहुत ही बड़ा जलवायु परिवर्तन हो गया। 

पुराने पेड़ की जड़ें बारिश के जल से नम हो गई और पेड़ की डालियां भी जोर जोर से हिल रही थी। चिडिया जो कि उस पेड़ पर अपना घर बनाए हुए थी वह भी बारिश के जल से परेशान हो गई। उसका घर भी गिरने की कगार पर था। 

चिड़िया ने सोचा की अब मुझे कहीं और अपना घर बनाना पड़ेगा। लेकिन उसे एक सोच आई। चिड़िया ने सोचा क्यों न मैं अपने घर को और बेहतर बनाऊं। चिड़िया ने उस जगह के बच्चों से कुछ सारंगी के तार लिए और उसे अपने घर की दीवारों को बांधने लगी। वह उसे मजबूती से बाँधती गई। 

जब बारिश फिर आई तो चिड़िया का घर न तो झूला और नहीं गिरा। वह बड़ी खुश थी कि उसने अपने घर को और बेहतर बनाया। 

कहानी का सार (Moral of the Story in Hindi)

इस कहानी से हमें यह सिखने को मिलता है कि हमें हर परिस्थिति में निराश नहीं होना चाहिए बल्कि हमें हर मुश्किल का सामना करने का साहस और हिम्मत दिखाना चाहिए और हमें हमेशा अपने संघर्ष के साथ सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए। 


7. गधे की सवारी नैतिक शिक्षा लघु कहानी (Moral Story in Hindi Short)

गधे की सवारी नैतिक शिक्षा लघु कहानी (Moral Story in Hindi Short)

किसी दूरदराज के गांव के मेले से एक बाप और उसका बेटा अपने गांव की ओर लौट रहे थे। मेले में उन्होंने एक गधा खरीदा था। रास्ते में उन्होंने सुना कि कोई बोल रहा था, अब देखो इन मूर्खों को, गधा इनके पास है फिर भी दोनों पैदल चल रहे हैं। दोनों ने सोचा बात तो ठीक है और वो दोनों गधे की पीठ पर चढ़ गए। 

रास्ते में उन्होंने फिर सुना कि कोई व्यक्ति फिर कुछ कह रहा था। अरे देखो देखो उस गरीब गधे को दोनों हट्टे कट्टे मुस्टंडे किस तरह उसका कचूमर निकाल रहे हैं। बेचारा मुश्किल से ही चल पा रहा है। बाप को दया आ गई। वह गधे की पीठ पर से नीचे उतर गया। 

जब वह खेतों के पास से गुजर रहे थे तो एक औरत की आवाज उनके कानों में पड़ी। लड़का भी कितना बेशर्म है। बेचारा बूढा तो पैदल चल रहा है और लड़का गधे की सवारी का मजा लूट रहा है। अच्छा होता यदि वह पैदल चलता और अपने बाप को गधे पर चढ़ने देता। लड़का नीचे उतर आया और बाप गधे की पीठ पर सवार हो गया। 

वह अभी गांव के पास पहुंचे ही थे कि एक पास से गुजरता हुआ व्यक्ति बोला। वाह भई वाह! पहली बार ऐसा स्वार्थी आदमी देखा है जो आप तो मजे से गधे पर लदा हुआ। है और अपने मासूम बेटे को पैदल चलने पर मजबूर कर रहा है। बस फिर क्या था उन दोनों ने गधे को बांस के साथ उल्टा बांधकर अपने कंधों पर उठा लिया और अपने घर की ओर चल दिए। 

जैसे ही वह घर के पास पहुंचे सब लोगों की हंसी फूट पड़ी। एक बुजुर्ग गांववासी आगे बढ़ा और पूछने लगा। गधे को इस तरह उलटा लटका कर क्यों ला रहे हो? क्या यह लंगड़ा लूला है कि यह चल नहीं सकता? 

बाप ने रास्ते में जो जो हुआ, वह सब जब उसने उन्हें विस्तारपूर्वक बताया तो वह बुजुर्ग बोला। अपने दिमाग का प्रयोग न करके तुम दूसरों के कहे अनुसार सब करते रहे। इसीलिए आज तुमपर सब हंस रहे हैं। 

आप ठीक कहते हैं श्रीमान। सब को खुश नहीं किया जा सकता। 


8. तेनाली रामा की सीख देने वाली छोटी कहानी (Tenali Rama Short Story with Moral in Hindi)

तेनाली रामा की सीख देने वाली छोटी कहानी (Tenali Rama Short Story with Moral in Hindi)

बहुत वर्ष हुए। विजयनगर में एक राजा राज करता था। उसका नाम था कृष्णदेव राय। एक बार उसके राज्य में चूहों की भरमार हो गई। जिधर देखो चूहे ही चूहे। राजा ने हुकुम सुनाया, हर घर में एक बिल्ली अनिवार्य रूप से पाली जाए। प्रत्येक घर में एक एक गाय प्रदान की जाए ताकि बिल्ली को दूध पर्याप्त मात्रा में मिल सके। 

तेनाली राम नाम का एक वजीर इस आज्ञा से नाखुश था। उसके अनुसार यह सारा प्रयोजन ही मूर्खतापूर्ण था। उसने एक तरकीब सोची। 

पहले ही दिन उसने अपनी बिल्ली के आगे खौलते हुए दूध का एक कटोरा उसके पीने के लिए रख दिया। बिल्ली ने जैसे ही उसमें मुंह डाला, उसका मुंह जल गया। उसकी आंखें बाहर निकलने को हो रही थी। वह झट से दौड़ गई। 

राजा को सभी और पूरी तरह बलिष्ठ बिल्लियां नजर आने लगी। वह अपनी आज्ञा से बहुत प्रसन्न था। वह घर घर जाकर खुद देखता था कि सब ठीक ठाक है या नहीं। आखिर वह तेनालीराम के घर पहुंचा। राजा को तेनालीराम के यहां बिल्कुल कमजोर हड्डियों का ढांचा बनी बिल्ली देखकर गहरा झटका लगा। 

राजा ने पूछा – क्या सारा दूध तुम खुद भी ले जा रहे हो? 

महाराज, अगर आप जान बक्श हैं तो सब कुछ सच सच आपसे कह दूं। हां हां, तुम निर्भय होकर सब विस्तार से बताओ। महाराज, पता नहीं क्या हुआ। मेरी बिल्ली तो दूध ही नहीं पी रही है। 

महाराज – यह कैसे हो सकता है? तेनाली राम – आप स्वयं ही देख लें महाराज।

तेनालीराम ने दूध का कटोरा रखा और जैसे ही उस बेचारी बिल्ली ने दूध का कटोरा देखा, वह डरकर भाग गई। अब तो राजा को सारा मामला समझने में देर न लगी कि तेनाली ने क्या किया था। उसने हुकुम सुनाया। तेनालीराम को बंदी बना लिया जाए और उसकी पीठ पर 100 कोड़े लगाए जाएं। 

तेनालीराम ने नजरें उठाए बिना कहा ठीक है महाराज, मुझे सख्त से सख्त सजा दें। परंतु जरा सोचिए कि हम देशवासियों के पीने के लिए भी जब दूध पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं है तो क्या यह मूर्खता नहीं है कि हम सारा दूध बिल्लियों को पिला दें? 

राजा को बात समझ में आ गई। उसने तेनालीराम को माफ कर दिया और अपने देशवासियों को वह गाय, उनके परिवार को दूध पीने के लिए ही रखने के लिए कह दिया। बिल्लियां तो चूहे खाकर भी अपना पेट भर सकती थीं।

कहानी का सार (Moral of the Story in Hindi) – मानव की सेवा सर्वोत्तम है।


9. चालक बंदर की छोटी सी सीख देने वाली कहानी  (Chalak Bandar Story in Hindi with Moral)

चालक बंदर की छोटी सी सीख देने वाली कहानी  (Chalak Bandar Story in Hindi with Moral)

किसी नदी के किनारे एक बहुत बड़ा पेड़ था। उस पर एक बंदर रहता था। उस पेड़ पर बड़े मीठे फल लगते थे। बंदर उन्हें भरपेट खाता और मौज उड़ाता। वह अकेले ही मजे में दिन गुजार रहा था। 

एक दिन एक मगर उस नदी में से पेड़ के नीचे आया। बंदर के पूछने पर मगर ने बताया कि वह वहां खाने की तलाश में आया है। इस पर बंदर ने पेड़ से तोड़कर बहुत से मीठे फल मगर को खाने के लिए दिए। इस तरह बंदर और मगर में दोस्ती हो गई। 

अब मगर हर रोज वहां आता और दोनों मिलकर खूब फल खाते। बंदर भी एक दोस्त पाकर बहुत खुश था। 

एक दिन बात बात में मगर ने बंदर को बताया कि उसकी एक पत्नी है जो नदी के उस पार उनके घर में रहती है। तब बंदर ने उस दिन बहुत से मीठे फल मगर को उसकी पत्नी के लिए साथ ले जाने के लिए दिए। इस तरह मगर रोज जी भरकर फल खाता और अपनी पत्नी के लिए भी लेकर जाता। 

मगर की पत्नी को फल खाना तो अच्छा लगता पर पति का देर से घर लौटना पसंद नहीं था। 

एक दिन मगर की पत्नी ने मगर से कहा कि अगर वह बंदर रोज रोज इतने मीठे फल खाता है तो उसका कलेजा कितना मीठा होगा। मैं उसका कलेजा खाऊंगी। 

मगर ने अपनी पत्नी को बहुत समझाया, पर वह नहीं मानी | एक दिन मगरमच्छ दावत के बहाने बंदर को अपनी पीठ पर बैठाकर अपने घर लाने लगा। नदी बीच में उसने बंदर को अपनी पत्नी की कलेजे वाली बात बता दी। 

इस पर बंदर ने कहा कि वह तो अपना कलेजा पेड़ पर ही छोड़ आया है। वह उसे हिफाजत से पेड़ पर रखता है। इसलिए उन्हें वापिस जाकर कलेजा लाना पड़ेगा। मगर ने बंदर को वापिस उस फल वाले पेड़ के पास ले गया। बंदर छलांग मारकर पेड़ पर चढ़ गया। 

उसने हंसकर कहा कि जाओ मूर्ख राजा घर जाओ और अपनी पत्नी से कहना कि तुम दुनिया के सबसे बडे मूर्ख हो। भला कोई भी अपना कलेजा निकालकर अलग रख सकता है क्या। 

कहानी का सार (Moral of the Story in Hindi)

बंदर की इस समझदारी से हमें यह पता चलता है कि मुसीबत के वक्त हमें घबराकर हिम्मत नहीं खोनी चाहिये बल्कि धैर्य और समझदारी से काम करना चाहिए।


10. टोपीवाला और बंदर की कहानी (Very Short Story in Hindi with Moral)

टोपीवाला और बंदर की कहानी (Very Short Story in Hindi with Moral)

एक बार एक टोपियों का व्यापारी अपनी टोपियां बेचने के लिए दूर किसी शहर की ओर जा रहा था। चलते चलते दोपहर हो गई। वह थक गया था। एक बड़े पेड़ के नीचे उसने अपनी टोपियों की टोकरी अपने कंधे से उतारी। अपने खाने का डिब्बा खोला और भोजन करने लगा। 

जल्दी तो कोई थी नहीं। उसने सोचा क्यों न कुछ देर आराम कर लिया जाए। वह वहीं लेट गया और जल्दी ही गहरी नींद ने उसे घेर लिया। उसे क्या पता था कि वह एक ऐसे पेड़ के नीचे सोया हुआ है, जिसमें ढेरों बंदरों ने अपना ठिकाना बनाया हुआ था। 

बंदरों ने जब टोकरी में पड़ी हुई रंग बिरंगी टोपियां देखी तो उन्होंने टोपियों से खेलने का मन बना लिया। वे एक एक करकर सभी नीचे आ गए और सभी ने एक एक टोपी उठा ली और जल्दी ही सभी पेड़ पर चढ़ गए। 

टोपी वाले की आंख खुली। जैसे ही उसकी नजर खाली टोकरी पर पड़ी, उसके पैरों तले से जमीन निकल गई। वह परेशान हो उठा कि उसकी सारी टोपियां कोई चोरी करके ले गया था। वह चिल्लाया। हाय हाय, मैं लुट गया, बर्बाद हो गया। कौन ले गया मेरी टोपियों को? अब मेरा क्या होगा?

परंतु जैसे ही उसकी नजर जरा ऊपर पेड़ की ओर उठी तो हैरान रह गया। उसकी सारी टोपियां तो बंदरों ने पहन रखी थी। उसने गुस्से से हाथों को ऊपर किया ताकि डरकर बंदर उसकी टोपियां नीचे फेंक दें। परंतु ऐसा कुछ न हुआ। अपितु बंदर भी उसकी नकल कर उसे चिढ़ा रहे थे। 

इससे उसके दिमाग में एक तरकीब सूझी। पहले उसने अपने हाथों को हिलाया। उसी तरह बंदर भी अपने हाथ हिलाने लगी। फिर वह ऊपर नीचे कूदने लगा। बंदर तो नकलची होते ही हैं, बंदर भी ऊपर नीचे कूदने लगे। 

फिर उसने अपनी टोपी अपने सिर से उतारी और जोर से उसे जमीन पर फेंक दिया। फिर क्या था। सभी बंदरों ने उसकी नकल की और अपनी अपनी टोपी को उन्होंने भी जमीन पर पटक दिया। 

टोपी वाले ने अपनी सारी टोपियां इकट्ठी की और वापिस अपनी टोकरी में डाल ली और फिर अपने रास्ते हो लिया। 

Moral of the Story in Hindi

इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि संकट आने पर हमें अपना दिमाग ठंडा रखना चाहिये और सुखबुझ से काम लेना चाहिये। समझदारी से बडे से बडे समस्या को सुलझाया जा सकता है।


11. बिल्ली के गले में घंटी (Moral Story in Hindi Short)

बिल्ली के गले में घंटी (Moral Story in Hindi Short)

एक बहुत बड़े मकान में सैकड़ों चूहे रहते थे। उन सबकी ज़िंदगी हंसते खेलते फुदकते बड़े आनंद से गुजर रही थी। परंतु एक दिन अचानक घर का मालिक एक बिल्ली उठा लाया। बिल्ली क्या आई? चूहों की तो जैसे शामत आ गई हो। 

बिल्ली बहुत डरावनी थी। उसे ढेर सारा दूध पीने को मिलता था, परंतु फिर भी उसकी संतुष्टि नहीं हो रही थी। वह घंटों लेटी रहती। तीन चार चूहे तो वह रोज पकड़कर खा जाती। समस्या दिन ब दिन गंभीर होती जा रही थी। 

थक हार कर चूहों ने सभा बुलाई, जिसमें हर छोटा बड़ा चूहा शामिल हुआ। एक बोला हमें इस मुसीबत से छुटकारा पाना ही होगा। भाइयों, अपने अपने सुझाव दो कि बिल्ली को कैसे मारा जाए या कैसे उससे पीछा छुड़ाया जाए।

बहुत समय तक खुसुर पुसुर होती रही। काफी देर बाद एक नन्हा चूहा आगे बढ़ा और बोला। क्यों न बिल्ली के गले में घंटी बांध दें। जहां कहीं वह जाएगी, घंटी की आवाज आ जाएगी और हम अपने अपने बिल में छुप जाएंगे। तो बिल्ली हमारा कुछ भी नहीं बिगाड़ पाएगी।

चारों ओर तालियां बजने लगी। वाह वाह! यह तो सचमुच बड़ा अद्भुत उपाय था। अरे! इस नन्हे का विचार तो सचमुच कमाल का है। लगता है अब हमारे फिर सुहावने दिन लौटने वाले हैं। अब हमें किसी तरह का भय खाने की जरूरत नहीं। आराम से चैन की बांसुरी बजाएंगे। सदा के लिए मुसीबत से छुटकारा। 

अरे, इस नन्हे ने तो हमारी चिंता का सदा के लिए अंत कर दिया। इसे सम्मान मिलना चाहिए। एक बूढा चूहा जो चुपचाप एक कोने में बैठा हुआ था, बोल उठा। सुनो। जरा मेरी भी सुनो। तुम सब एक बात भूल रहे हो क्या? एक बात तो बताओ। बिल्ली के गले में घंटी बांधेगा कौन?

सबके होश उड़ गए। कौन मौत के मुंह में जाए। किसी में इस काम को पूरा करने का बीड़ा उठाने की हिम्मत नहीं थी। ऐसा खतरनाक काम कौन पसंद करता? 

सभी एक दूसरे का मुंह ताकते रह गए। अचानक बिल्ली की आवाज आई। सभी अपनी अपनी जान बचाने के लिए अपने अपने बिलों में घुस गए। 

कहानी का सार (Moral of the Story in Hindi)

सुझाव देना आसान है, परंतु अमल करना मुश्किल।


12. चालाक लोमड़ी और मुर्ख कौवा छोटी कहानी इन हिंदी (Short Story In Hindi With Moral)

चालाक लोमड़ी और मुर्ख कौवा छोटी कहानी इन हिंदी (Short Story In Hindi With Moral)

बहुत पुरानी बात है। एक कौवा भोजन की तलाश में इधर उधर भटक रहा था, परंतु उसके हाथ कुछ न लगा। वह थका मांदा एक पेड़ पर जा बैठा। 

अरे वाह! किस्मत हो तो ऐसी। उसे एक प्लेट में पनीर का एक टुकड़ा दिखाई दिया। वह प्लेट के पास पहुंचा। उसने अपनी चोंच से उसे उठा लिया और उड़ने लगा। 

बहुत से कौवे उसके पीछे पीछे उड़ने लगे। वह भी पनीर को उससे छीनना चाहते थे। वह सबको चकमा देने में कामयाब हो गया और एक पेड़ की शाखा पर जाकर बैठ गया। 

उधर ही कहीं एक लोमड़ी वहां से गुजर रही थी। लोमड़ी ने कौवे की चोंच में फंसा पनीर देखा तो उसके मुंह में पानी आ गया। उसने जल्द ही कौवे से उसका पनीर अपने कब्जे में लेने की योजना बनाई और उसने कौवे की ओर देखा और बोली।

अरे कौवे भाई तुम कितने खूबसूरत हो। मैं अपना परिचय तुम्हें दे दूं। मैं एक भोली भाली लोमड़ी हूं। मेरी सहेलियों ने मुझे बताया है कि तुम्हारी आवाज में गजब की मिठास है। क्या यह बात सही है?

यह सुनकर कौवा हैरान रह गया। आज तक तो किसी ने उसकी आवाज की तारीफ नहीं की थी, परंतु वह चुप रहा। 

कौवे भाई, अपनी मधुर आवाज में क्या तुम मेरे लिए गाना नहीं गा सकते? सुनाओ न भैया! परंतु अभी भी वह मौन था। 

लोमड़ी फिर बोली – क्या तुम अपनी प्यारी बहन की इतनी सी इच्छा भी पूरी नहीं कर सकते? तुम कितने सुंदर हो। तुम्हारे पंखों का तो कहना ही क्या। मेरे लिए गाना गाना कौवा भैया।

कौवा उसके झांसे में आ गया। उसने जैसे हि अपनी चोंच खोली और लगा कांव कांव करने। अरे यह क्या? पनीर उसकी चोंच से निकला और जमीन पर आ गिरा। 

लोमड़ी ने झट से उसे झपट लिया और खा गई। लेकिन जब तक कौवे को समझ में आता कि क्या हुआ, लोमड़ी वहां से चल दी। कौवा उदास हो गया। 

कहानी का सार (Moral of the Story in Hindi)

अब पछताए क्या होत जब चिड़िया चुग गई खेत। तभी तो कहते हैं चापलूसों से बचो। इनका विश्वास नहीं करना चाहिए।


13. प्यासा कौवा छोटी कहानी इन हिंदी (Moral Story for Kids In Hindi)

प्यासा कौवा छोटी कहानी इन हिंदी (Moral Story for Kids In Hindi)

वे गर्मियों का मौसम था। इस बार गर्मियां कुछ ज्यादा ही है क्योंकि बिना नये पौधे लगाये जो पेड़ पौधे थे उन्हें भी काटने के कारण नदिया, तालाब सब सूख गये। 

इतने में वहाँ पहुँचा एक प्यासा कौवा। गर्मी के कारण उसका हाल बेहाल था। कव्वे ने सोचा हाँ थोडा पानी मिल जाये तो अच्छा होगा। उड़ते उड़ते कव्वे ने तालाब, नदिया सब तलाश किया। गर्मी के कारण सब सूख चुके थे। 

कव्वे का प्यास और भी बढ़ने लगा। कव्वे ने कहा हे भगवान! कहीं से भी एक घूंट पानी पिला दे। कहते हुए अपना खोज जारी रखा। इतने में उसको एक कुआ नजर आया। 

कुआ को देखकर कव्वे ने कहा भगवान की कृपा है। मुझे कुआ नजर आया। जैसे ही कव्वा कुए में देखा तो कुआ बिना पानी सुखा पड़ा है। हे भगवान! कहते हुए ये कौवा वहां से उड़ गया।

उड़ते उड़ते उसकी नजर एक घर के पास रखा हुआ मटके पर गई। जैसे ही उसने मटके के अंदर देखा, बहुत निराश हुआ। और कहा – हे भगवान! पानी तो दिया लेकिन इतना कम कि मैं ना ही पी सकता हूं क्योंकि पानी बहुत नीचे है। वह बहुत निराश हुआ। 

इतने में उसकी नजर पास पड़े हुए छोटे छोटे कंकर पर पड़ी। उसको यह विचार आया। वे एक एक करके कंकर को मटके में डालने लगा। वहीं धीरे धीरे पानी ऊपर आने लगा। कव्वे ने पानी पीकर अपनी प्यास बुझाई। और कहा, हे भगवान, शुक्रिया शुक्रिया कहते हुए उठ गया। 

Moral of the Story in Hindi

इस कहानी से हमें यह सबक मिलता है कि कितनी भी मुश्किल समय आये, अगर हम मेहनत और समझदारी से काम करें तो हमें ज़रूर कामयाबी मिलेगी। तो हमें भी ऐसे ही समझदारी से रहना है।


14. साप की खाल छोटी कहानी इन हिंदी (Kids Story with Moral in Hindi)

साप की खाल छोटी कहानी इन हिंदी (Kids Story with Moral in Hindi)

दादा जी – तुम रो क्यों रहे हो शाइनी?

शाइनी – दादा जी, मेरे दांत में बहुत दर्द हो रहा है। 

शाइनी की बहन – दादा जी। मां कह रही थी कि शाइनी का दांत टूटने वाला है।

दादा जी – ओह ये तो बहुत अच्छी बात है। हां चलो इसे अच्छे से समझने के लिए मैं तुम्हें एक कहानी सुनाता हूं। बैठ जाओ।

दोनो बच्चे – ये कहानी सुनेंगे।

दादा जी कहानी सुनाते हुये – स्केली नाम का एक छोटा सांप था जो जंगल में रहता था और बिल्कुल तुम दोनों की तरह वह बहुत शरारती था। वह अपने पापा के साथ रहता था। 

स्केली का पापा – स्केली बस बहुत खेल लिये। चलो जल्दी आ जाओ।

स्केली – ठीक है पापा।

लेकिन एक दिन स्केली बहुत बेचैन होने लगा। 

स्केली का पापा – आज तुम इतने बेचैन क्यों हो?

स्केली – पता नहीं पापा, लेकिन मेरे सारे शरीर में बहुत खुजली हो रही है।

स्केली का पापा – स्केली, तुम साफ सफाई तो रखते हो ना?

स्केली – हां पापा, मैं दिन में दो बार अपने आपको मिट्टी में रगड़ता हूं। 

लेकिन अगले दिन स्केली की खुजली और ज़्यादा बढ़ गई।

स्केली – मेरे शरीर में बहुत दर्द हो रहा है पापा क्यों? कुछ समझ नहीं आ रहा है।

स्केली का पापा – मुझे पता है तुम्हें क्या हो रहा है। अब तुम बड़े हो रहे हो।

स्केली – पर ये सहन नहीं हो रहा है। 

तब एक दिन बहुत अजीब घटना हुई।

स्केली – पापा पापा ये देखो मेरे गर्दन में, यह दर्द बढ़ रहा है।

स्केली का पापा – क्या क्या हुआ? 

स्केली – पापा, आपको तो जरा भी चिंता नहीं हो रही। मुझे दर्द हो रहा है।

स्केली का पापा – मुझे पता है। अच्छा वह पत्थर दिख रहा है तुम्हे। जाओ जाकर अपनी गर्दन को वहां उस पत्थर पर जाकर रगड़कर आओ। 

स्केली – लेकिन पापा। आप क्यों मुझे ऐसा करने के लिए बोल रहे? जिसमें दर्द होगा। 

स्केली का पापा – जाओ और वो करो जो मैं तुमसे कह रहा हूं। अभी जाओ अभी मेरे बच्चे।

स्केली – पापा ये तो जादू है। मैं तो बिल्कुल नया साहब बन गया।

स्केली का पापा – हां बिल्कुल जो तुम्हारे साथ अभी अभी हुआ वो हम सापों के बड़े होने की प्रक्रिया है। हम अपनी पुरानी चमड़ी से ढके होते हैं। इस दर्द को सहन करके हम कीटाणुओं से भरी पुरानी चमड़ी को छोड़कर नई चमड़ी में आ जाते हैं। समझे? चलो अब तुम बिल्कुल नए नवेले सांप लग रहे हो।

स्केली – हां पापा अब मैं समझ गया। अब मैं जाकर अपने दोस्तों को अपनी नई चमड़ी दिखाऊंगा।

दादा जी शाइनी से कहते हुये – और बिल्कुल इसी तरह तुम्हारा पुराना कमजोर दांत टूट जाएगा और नया मजबूत दांत उसकी जगह आ जाएगा। संघर्ष हमेशा कुछ अच्छा ही लेकर आता है। 

शाइनी और उसकी बहन दोनो खुश हो गये और हंसने लगे।


15. बंधु बंदर की चालाकी: एक नैतिक कहानी (Hindi Moral Stories for Kids)

बंधु बंदर की चालाकी: एक नैतिक कहानी (Hindi Moral Stories for Kids)

एक समय की बात है। एक प्यारा सा जंगल था, जहां हर तरह के जानवर रहते थे। यहां पर एक खूबसूरत नदी बहती थी जिसका पानी शुद्ध और शांत था। 

इस जंगल में एक सुंदर सी गुफा थी जिसमें एक चालाक बंदर रहता था। उसका नाम बंधु था। बंधु सबसे चतुर था और सभी जानवर उसे दोस्त मानते थे। 

एक दिन जंगल में चल रही थी एक मजेदार बारिश। हर जानवर बारिश की खुशी में नाच रहा था। बाघ भी अपने बच्चों के साथ खुश था। हाथियों ने बारिश के मौसम में अपने बच्चों को नदी के किनारे खेलने ले गया। 

और देखो देखो उधर चिड़िया भी अपने रंग बिरंगे पंख फैलाकर उड़ान भरी। लेकिन कुछ दिन बाद जंगल में अचानक से कुछ गड़बड़ हो गई। पानी की धारा तेज हो गई और नदी किनारे से बाहर आने लगी। 

सभी जानवर परेशान हो गए। उन्होंने समझा कि कुछ बड़ा होने वाला है। सभी जानवर मिलकर बात करने लगे। बाघ बोला हम सबको मिलकर यह समस्या हल करनी होगी। हमें कुछ सोचना पड़ेगा।

सबने सहमति से सिर हिलाया। तभी बंधु ने कहा – मुझे एक आइडिया आया है। क्यों ना हम सब मिलकर एक बांध बनाएं जो नदी के पानी को रोक सके।

सब जानवर बंधु की बात सुनकर खुश हुए। वे सब मिलकर काम पर लग गए। हाथी ने बड़े पत्थर लेकर आया। शेर ने अपनी ताकत से उन्हें जगह पर रखा और बंदर ने उन्हें धीरे धीरे चलाने का निर्माण किया। 

परीक्षा का समय आया और बांध ने काम किया। नदी का पानी रूक गया। सब जानवर बहुत खुश थे। उन्होंने देखा कि साथ मिलकर कुछ भी मुश्किल नहीं होती। 

लेकिन एक दिन एक और बड़ी मुसीबत आई। एक बड़ा सांप जंगल में घूम रहा था और जानवरों को डराता था। सब डर गए और चुप हो गए। लेकिन बंधु नहीं हार माना। उसने सोचा कि कैसे सांप को रोका जाए। उसने चालाकी से एक बड़ा जाल बनाया और उसमें सांप को फंसाया। 

सब जानवर देखकर खुश हुए और समझे कि बंधु की चालाकी ने सबको बचा लिया। इस घटना के बाद सब जानवरों ने बंधू को अपना नेता माना। 

वे समझ गए कि एक दूसरे की मदद से सब कुछ मुमकिन है। वे अब एक साथ रहकर हर मुश्किल का सामना करते थे और जंगल में अमन और शांति बनी रहती थी। 

कहानी का सार (Moral of the Story in Hindi)

तो दोस्तो, इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि एकता में ही असली शक्ति है


आशा करते हैं कि हमारी आज की यह top 15 short story with moral in Hindi for Kids (नैतिक कहानियाँ) आपको जरूर पसंद आयी होगी जिन्हे आप अपने बच्चो को सुनायेंगे ताकि इन कहानियो से उन्हे जीवन के मूल्य, सच्चाई, और आदर्श के बारे में बहुत कुछ सिखने को मिलेगा।

आपको यह short moral stories in Hindi कैसी लगी हमें कमेंट में जरूर बताएं क्योंकि आपका विचार हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है। और साथ ही इस पोस्ट को आप अपने दोस्तों को भी शेयर कीजियेगा।

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Rakesh Dewangan

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