त्याग के बिना ”कुछ भी” – Tyag, Sambhav, Sans Par Suvichar

त्याग के बिना ”कुछ भी”
पाना संभव नहीं, क्योंकि
सांस लेने के लिए भी पहले
सांस छोड़नी पड़ती है.

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