जिंदगी फिर कभी न मुस्कुराई – Zindagi, Muskurahat, Bachpan, Mitti, Khilone Par Shayari

जिंदगी फिर कभी न मुस्कुराई
बचपन की तरह
मैंने मिट्टी भी जमा की
खिलौने भी लेकर देखे

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जिन्दगी सुनतू यहीं पर रुकनाहम हालात बदलकर आते हैं

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